धनतेरस पर बांध पर किसानों के साथ अर्चना चिटनिस ने जलाए दीप, दिया पानी और जीवित मिट्टी सहेजने का संदेश

08 Nov 2026 - 01:26
धनतेरस पर बांध पर किसानों के साथ अर्चना चिटनिस ने जलाए दीप, दिया पानी और जीवित मिट्टी सहेजने का संदेश

धनतेरस पर बांध पर किसानों के साथ अर्चना चिटनिस ने जलाए दीप, दिया पानी और जीवित मिट्टी सहेजने का संदेश

बुरहानपुर। धनतेरस के अवसर पर बुरहानपुर विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस ने एक अनूठी पहल करते हुए जिले की सबसे बड़ी भावसा मध्यम सिंचाई परियोजना के बांध पर किसानों के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर पर्व मनाया। उन्होंने किसानों को मिठाई बांटकर शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर पानी और जीवित मिट्टी के संरक्षण का संदेश देते हुए ’’“पानी करेंगे खर्च कम, पर कमाएंगे भरपूर”’’ का नारा भी गूंजा।

श्रीमती चिटनिस ने कहा कि धनतेरस पर हम धन, वैभव और लक्ष्मी की पूजा करते हैं, लेकिन हमें यह भी समझना होगा कि हमारी समस्त समृद्धि के मूल में पानी और जीवित मिट्टी है। पानी नहीं होगा तो खेती कैसे होगी, फसल कैसे लहलहाएगी और धन का सृजन कैसे होगा? जिस तरह हम अपने धन और वैभव को संभालकर रखते हैं, उसी तरह पानी और मिट्टी को भी सहेजना आवश्यक है। हमारा असली धन पानी और जीवित मिट्टी है। उन्होंने कहा कि बुरहानपुर केला, गन्ना, कपास, हल्दी और विभिन्न मसालों की खेती के लिए जाना जाता है। इन फसलों के साथ जिले के उद्योग, व्यापार और जनजीवन भी पानी पर निर्भर हैं। इसलिए जल संरक्षण केवल किसानों की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

कम बारिश ने बढ़ाई चिंता, उपलब्ध पानी का समझदारी से करें उपयोग

जिले में वर्षा के आंकड़े बताते हुए श्रीमती चिटनिस ने कहा कि गत वर्ष जिले में औसतन 891.2 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जबकि इस वर्ष औसत वर्षा 780.1 मिलीमीटर दर्ज की गई है। यानी पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 111 मिलीमीटर कम बारिश हुई है। वर्षा में आई इस कमी ने हमारे सामने चिंता का विषय उत्पन्न किया है। हमें अभी से उपलब्ध जलराशि का विवेकपूर्ण उपयोग करने और आने वाली बारिश की हर बूंद को सहेजने की तैयारी करनी होगी। उन्होंने किसानों से अपील की कि कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को प्राथमिकता दें और खेती में फसल विविधीकरण अपनाएं। एक ही फसल पर लगातार निर्भर रहने के बजाय फसल चक्र में बदलाव लाना समय की आवश्यकता है। विशेष रूप से केले की खेती का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लगातार एक ही खेत में केला लगाने से विषाणु और रोगों के प्रकोप की आशंका बढ़ सकती है। इससे जिले की केला खेती प्रभावित होने का खतरा रहता है। इसलिए अलग-अलग फसलें अपनाने और मिट्टी की सेहत बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए। जीवित मिट्टी ही बेहतर उत्पादन की बुनियाद है।

आने वाली बारिश में जनभागीदारी से लें जल संरक्षण का संकल्प

श्रीमती चिटनिस ने दीपावली के अवसर पर किसानों और नागरिकों से आह्वान किया कि आने वाली बारिश में जनभागीदारी के साथ जल संरक्षण का व्यापक अभियान चलाएं। विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) तथा शासन की अन्य योजनाओं का उपयोग करते हुए गांव-गांव में जल संरक्षण के कार्यों को गति दें। हमारा दृढ़ संकल्प होना चाहिए कि ’’खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में’’ रोका जाए, ताकि वर्षा की हर बूंद का अधिकतम उपयोग हो सके। उन्होंने घरों में वर्षा जल संचयन का महत्व बताते हुए कहा कि घर की छत पर बरसने वाले पानी को भी व्यर्थ बहने देने के बजाय जमीन में पहुंचाएं। इससे धरती मां की प्यास बुझाने और भूजल स्तर बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देते हुए कहा कि ’’“धरती हमसे कहती हैकृपानी लेते हो मुझसे, पानी डालो भी मुझमें।”’’ जिस धरती से हम अपनी खेती और जीवन के लिए पानी लेते हैं, उसी धरती को वर्षा जल के माध्यम से पानी लौटाना भी हमारा दायित्व है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता और फसल विविधीकरण को खेती का अभिन्न हिस्सा बनाकर ही किसानों की समृद्धि तथा आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है।

भावसा मध्यम सिंचाई परियोजना के बांध पर किसानों के साथ मनाया गया धनतेरस का यह पर्व एक सार्थक संकल्प के साथ संपन्न हुआ-पानी करेंगे खर्च कम, पर कमाएंगे भरपूरय खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में और धरती मां की प्यास बुझाने के लिए हर घर से वर्षा जल का संचयन।

इस अवसर पर शाहपुर नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि वीरेन्द्र तिवारी, जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि प्रदीप पाटिल, जिला पंचायत सदस्य किशोर पाटिल, गफ्फार मंसूरी, स्वर्णसिंह बर्नेे, प्रशांत पाटिल, रूद्रेश्वर एंडोले, अजहर उल हक, शांतिलाल पाटिल, वैभव महाजन, लालसिंह बारेला, अशोक राठौर, भीमसिंह, विजय राठौर, नारायण राठौर एवं रमेश राठौर सहित अन्य जनप्रतिनिधि, किसान व ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

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