धनतेरस के दिन सोना और चांदी खरीदने की परंपरा भारतीय संस्कृति में सदियों पुरानी है। इसके पीछे धार्मिक, पौराणिक और व्यावहारिक (आर्थिक) कई मान्यताएं जुड़ी हुई हैं।

07 Nov 2026 - 01:58
धनतेरस के दिन सोना और चांदी खरीदने की परंपरा भारतीय संस्कृति में सदियों पुरानी है। इसके पीछे धार्मिक, पौराणिक और व्यावहारिक (आर्थिक) कई मान्यताएं जुड़ी हुई हैं।

धनतेरस के दिन सोना और चांदी खरीदने की परंपरा भारतीय संस्कृति में सदियों पुरानी है। इसके पीछे धार्मिक, पौराणिक और व्यावहारिक (आर्थिक) कई मान्यताएं जुड़ी हुई हैं।

१. पौराणिक मान्यताएं (समुद्र मंथन और भगवान धन्वंतरि)

समुद्र मंथन और अमृत कलश: शास्त्रों के अनुसार, कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि (आयुर्वेद के जनक) अपने हाथों में अमृत से भरा स्वर्ण कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण इस दिन बर्तन और पीली धातु (सोना) खरीदने की परंपरा शुरू हुई, जिसे अत्यंत शुभ और आरोग्य देने वाला माना जाता है।

 माता लक्ष्मी और कुबेर का आगमन: ऐसी मान्यता है कि धनतेरस के दिन खरीदी गई वस्तुओं में तेरह गुना (13x) वृद्धि होती है। सोना और चांदी को माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर का प्रतीक माना जाता है। इन्हें घर लाने से वर्ष भर सुख-समृद्धि और वैभव बना रहता है।

२. यमराज और अकाल मृत्यु से रक्षा की कथा

एक प्रचलित लोककथा के अनुसार, राजा हिम के पुत्र को श्राप था कि विवाह के चौथे दिन सर्पदंश से उसकी मृत्यु हो जाएगी। उसकी पत्नी ने चौथे दिन शयनकक्ष के दरवाजे पर सोने-चांदी के आभूषणों और सिक्कों का ढेर लगा दिया और चारों ओर दीपक जलाए। जब यमराज सांप के रूप में आए, तो आभूषणों और दीयों की तेज चमक से उनकी आंखें चौंधिया गईं। वे कक्ष में प्रवेश नहीं कर सके और रात भर आभूषणों के ढेर पर बैठकर पत्नी के गीत सुनते रहे। सुबह होने पर यमराज बिना प्राण लिए लौट गए। तभी से यह मान्यता है कि धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदने से घर की नकारात्मकता दूर होती है और परिवार की अकाल मृत्यु से रक्षा होती है।

३. व्यावहारिक और आर्थिक कारण

शुभ निवेश और बचत: प्राचीन काल में बैंकिंग व्यवस्था नहीं थी, इसलिए लोग अपनी बचत को सोने और चांदी के रूप में सुरक्षित रखते थे। त्योहार के बहाने साल में कम से कम एक बार ठोस संपत्ति (Asset) में निवेश करने की यह एक उत्तम परंपरा बन गई, जो संकट के समय काम आती है। चांदी की शीतलता: ज्योतिष और आयुर्वेद में चांदी को चंद्रमा से जोड़ा गया है, जो मन को शीतलता और शांति प्रदान करती है।

विशेष बात: यदि किसी

कारणवश सोना या चांदी

खरीदना संभव न हो, तो

इस दिन पीतल के बर्तन,

धनिया के बीज, झाड़ू या

गोमती चक्र खरीदना भी

उतना ही शुभ और फलदायी माना जाता हैं 

धनतेरस के दिन शुभ वस्तुएं खरीदने के साथ-साथ कुछ खास चीजों को खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं और वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दिन नीचे दी गई वस्तुओं को खरीदना अशुभ माना जाता है:

 लोहे से बनी वस्तुएं: ज्योतिष शास्त्र में लोहे का संबंध शनि देव से माना गया है। धनतेरस समृद्धि और लक्ष्मी-कुबेर के स्वागत का दिन है, इसलिए इस दिन लोहे का सामान या बर्तन खरीदने से आर्थिक नुकसान और दुर्भाग्य आने की मान्यता है।

स्टील और एल्युमिनियम के बर्तन: स्टील (जो लोहे का ही रूप है) और एल्युमिनियम को शुद्ध धातु नहीं माना जाता। एल्युमिनियम पर राहु का प्रभाव माना जाता है, जो घर में अशांति और दरिद्रता ला सकता है। इसके स्थान पर पीतल, तांबा या चांदी के बर्तन खरीदना शुभ होता है।

कांच और चीनी मिट्टी के बर्तन: कांच का संबंध भी राहु से जोड़ा जाता है। इसके अलावा कांच बहुत नाजुक होता है और जल्दी टूटता है, जिसे शुभ अवसर पर अस्थिरता का प्रतीक माना जाता है।

 नुकीली या धारदार वस्तुएं: चाकू, कैंची, सुई, पिन या कोई भी हथियार इस दिन नहीं खरीदना चाहिए। इन्हें संबंधों में कड़वाहट और घर की सुख-शांति भंग करने वाला माना जाता है।

 काले रंग की वस्तुएं: हिंदू धर्म में किसी भी मांगलिक कार्य या त्योहार की खरीदारी में काले रंग के कपड़े, जूते या अन्य सामान को नकारात्मकता का प्रतीक मानकर वर्जित रखा गया है।

तेल या घी (चिकनाई वाली चीजें): धनतेरस के दिन सरसों का तेल, रिफाइंड या घी खरीदने से बचना चाहिए। इन्हें भी शनि से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए पूजा के दीयों के लिए तेल-घी एक दिन पहले ही खरीद कर रख लेना बेहतर माना जाता है।

नकली आभूषण (Artificial Jewelry) धनतेरस पर असली सोना-चांदी ही समृद्धि का प्रतीक हैं। इस दिन आर्टिफिशियल ज्वेलरी खरीदने से घर में बरकत रुकने की मान्यता है।

यदि इस दिन किसी को उपहार देना हो, तो अपने लिए खरीदी गई वस्तु को दूसरे को देने से भी बचना चाहिए, क्योंकि मान्यता है कि इससे घर की लक्ष्मी दूसरे के पास चली जाती है।

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