लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ का संकल्प लेकर प्रबुद्ध नागरिकों ने किया लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का आह्वान

‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ का संकल्प लेकर प्रबुद्ध नागरिकों ने किया लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का आह्वान

बुरहानपुर। लोकतंत्र की मजबूती निष्पक्ष चुनाव, जागरूक नागरिकों और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति विश्वास से सुनिश्चित होती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति और विरोध का अधिकार है, लेकिन राजनीतिक विरोध के नाम पर संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को प्रभावित करना, चुनाव सुधारों पर भ्रम फैलाना और समाज में अराजकता का वातावरण निर्मित करना उचित नहीं है। राष्ट्रहित, राष्ट्रीय एकता और लोकतांत्रिक मर्यादाओं की रक्षा के लिए प्रत्येक नागरिक को सजग एवं जागरूक रहना होगा।

इन्हीं उद्देश्यों को लेकर बुरहानपुर के परमानंद गोविंदजीवाला ऑडिटोरियम में ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ अभियान के अंतर्गत प्रबुद्ध नागरिक संगोष्ठी आयोजित की गई। मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष संजय नगायच मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) ने की। आयोजन लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ समिति, जिला बुरहानपुर द्वारा किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम् के सामूहिक गायन से हुआ। भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज माने ने स्वागत उद्बोधन दिया। इस अवसर पर श्रीमती अर्चना चिटनिस ने मुख्य अतिथि संजय नगायच को ‘वंदेमातरम् की आत्मकथा’ पुस्तक भेंट कर स्वागत किया।
लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व-संजय नगायच
मुख्य वक्ता संजय नगायच ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। इसकी लोकतांत्रिक परंपराएं, सांस्कृतिक विरासत और संवैधानिक संस्थाएं देश की पहचान हैं। प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने और असहमति व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ निर्वाचन आयोग, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा का सम्मान भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया और परिणामों को लेकर असहमति हो सकती है, लेकिन तथ्यों को समझे बिना संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करना और जनता के जनादेश पर सवाल उठाना उचित नहीं है। लोकतंत्र में जनता सर्वोच्च है और उसके निर्णय को स्वीकार करना प्रत्येक राजनीतिक दल और नागरिक का दायित्व है। उन्होंने सभी से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया।
मतदाता सूची की शुद्धता और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की मजबूती का आधार- अर्चना चिटनिस
अध्यक्षीय संबोधन में श्रीमती अर्चना चिटनिस ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की आवश्यकता और महत्व पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में मृतक, स्थानांतरित, अनुपस्थित, डुप्लीकेट और अस्तित्वहीन मतदाताओं के नाम बने रहना निष्पक्ष निर्वाचन की दृष्टि से गंभीर विषय है। प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में होना चाहिए और अपात्र प्रविष्टियों को हटाया जाना आवश्यक है। मतदाता सूची का शुद्धिकरण चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण जैसी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष द्वारा विवाद और भ्रम की स्थिति निर्मित करना उचित नहीं है। चुनाव सुधारों पर चर्चा हो सकती है, लेकिन निर्वाचन आयोग और संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को प्रभावित करने वाले बयानों से बचना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी की बयानबाजी पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत के लोकतंत्र और वैश्विक प्रतिष्ठा को कमजोर करने के प्रयासों के प्रति देशवासियों को सजग रहना होगा। विदेशी ताकतों के हस्तक्षेप और उनके एजेंडे को लेकर उठने वाली आशंकाओं को भी गंभीरता से समझने की आवश्यकता है।
’’राष्ट्रहित, राष्ट्रीय सुरक्षा और विश्व शांति सर्वोपरि’’
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति का उल्लेख करते हुए श्रीमती चिटनिस ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया था कि भारत शांति के साथ है। यह भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाली सोच का उदाहरण है। भारत अपने सिद्धांतों और राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेता है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की एकता-अखंडता जैसे विषयों पर राजनीतिक लाभ-हानि के नजरिए से विचार नहीं होना चाहिए। वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि उन घटनाओं में अनेक परिवारों ने अपने परिजनों, घरों और संपत्तियों को खोया। पीडि़त परिवारों की पीड़ा और न्याय की अपेक्षा को समान संवेदनशीलता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक चेतना विश्व कल्याण, शांति और सद्भाव का संदेश देती है। सामाजिक एकता, सकारात्मक सोच और आपसी सहयोग ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति हैं। लोकतंत्र में जनता का जनादेश सर्वोपरि है और उसका सम्मान सभी को करना चाहिए।
संगोष्ठी में लोकतांत्रिक मूल्यों, चुनाव सुधारों, राष्ट्रीय सुरक्षा, संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका और नागरिक दायित्वों पर सार्थक विमर्श हुआ। विभिन्न समाजों, व्यापारी संगठनों और सामाजिक क्षेत्रों से जुड़े प्रबुद्ध नागरिकों की सहभागिता रही।
इस अवसर पर लोकतंत्र सेनानी एवं वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण शेंडे, महापौर श्रीमती माधुरी अतुल पटेल, जिला महामंत्री चिंतामन महाजन, ईश्वर चौहान, शाहपुर नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमती साधना वीरेंद्र तिवारी, उपाध्यक्ष श्रीमती रजनी गोपाल चौधरी, पावरलूम फेडरेशन अध्यक्ष जयंती नवलखे तथा बुरहानपुर जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि प्रदीप पाटिल सहित विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि, व्यापारी संगठनों के पदाधिकारी एवं प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन दुर्गेश शर्मा ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम् और समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
दिनांक:- 01 नवंबर 2026
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