संजय सिंह की संघर्ष गाथा: नौकरी की आस में 75 वर्षीय मां के साथ फिर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे पूर्व सफाई कर्मी
संजय सिंह की संघर्ष गाथा: नौकरी की आस में 75 वर्षीय मां के साथ फिर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे पूर्व सफाई कर्मी

बुरहानपुर जिले की जनसुनवाई में मंगलवार, 3 नवंबर को एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ न्याय की गुहार लगाती एक दर्दनाक और संघर्षपूर्ण तस्वीर सामने आई। नगर निगम के पूर्व सफाई कर्मी संजय सिंह ने एक बार फिर झाड़ू उठाकर और हाथों में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा थामकर अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। उनके साथ उनकी 75 वर्षीय वृद्ध माता ताराबाई भी अपने बेटे के लिए नौकरी की भीख मांगने कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं।
कलेक्टर कार्यालय परिसर में "भारत माता की जय" के गगनभेदी नारों के बीच संजय सिंह ने अपनी पीड़ा बयां की और कलेक्टर महोदय को लिखित ज्ञापन सौंपकर अपनी आपबीती सुनाई।
क्या है पूरा मामला?
वर्ष 1988 से शुरुआत
संजय सिंह ने वर्ष 1988 में बतौर दैनिक वेतन भोगी सफाई कर्मचारी कार्य करना शुरू किया था। उन्हें तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष लक्ष्मीदास मास्टर द्वारा कार्य पर रखा गया था।
वेतन का सफर: शुरुआत में उन्हें 416 रुपए दैनिक वेतन मिलता था, जो समय के साथ बढ़ते-बढ़ते वर्ष 2018 तक 6,030 रुपए प्रतिमाह हो गया था। इस दौरान उन्होंने नगर सुधार न्यास से लेकर नगर निगम तक अपनी निष्ठा और ईमानदारी से ड्यूटी निभाई।
रिश्वत का विरोध बना मुसीबत: संजय सिंह का आरोप है कि वर्ष 2018 में जब उन्होंने विभाग में हो रहे भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी का खुलकर विरोध किया, तो तत्कालीन सेक्टर अधिकारी ने उन्हें अचानक काम से बैठा दिया (कार्य से बाहर कर दिया)।
न्याय की आस में भटक रहा परिवार
नौकरी छूटने के बाद से ही संजय सिंह का परिवार आर्थिक तंगी और संघर्ष के दौर से गुजर रहा है। कई बार लिखित आवेदन देने और शासन-प्रशासन के चक्कर काटने के बावजूद अब तक उन्हें न्याय या रोजगार नहीं मिला है।
हर बार की तरह इस बार भी 3 नवंबर को जनसुनवाई में पहुंचकर संजय सिंह ने अपनी आवाज बुलंद की है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या संज्ञान लेता है और क्या 75 वर्षीय मां की आंखों के आंसू पोंछते हुए संजय सिंह को दोबारा उनकी नौकरी मिल पाती है या नहीं।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0

