संगम तट पर झाड़ फूक के नाम खुलेआम अमानवीयता

संवाददाता अनंत पुरी प्रयागराज

प्रयागराज : संगम तट पर गंगा दहशरा पर जहां एक ओर श्रद्धालु आस्था के गोते लगाते रहे वहीं दूसरी ओर झाड़ फूक के नाम पर अमानवीयता की सारी हदें पार हो गईं। रोक के बाद भी खुलेआम संगम तट पर झाड़ फूंक का खेला होता रहा और एक युवती व तमाम महिलाएं इस अंधविश्वास का शिकार बनीं। हजारों की भीड़ में अंधविश्वास का खेल चल रहा था और किसी ने रोकने की कोशिश भी नहीं की।

रविवार को गंगा दशहरा होने के कारण त्रिवेणी तट पर सुबह से ही हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ जमा थी। इन्हीं श्रद्धालुओं के बीच कुछ अंध विश्वासी भी पहुंचे। छतरपुर से आए एक परिवार की युवती ने जब खुद को बचाने की गुहार लगाई तो लोगों का ध्यान इस ओर गया। ऊपरी साया हटाने के नाम पर पाखंडी एक युवती को बालों से पकड़ कर खींच रहा था। बीच धारा में ले जाकर न सिर्फ युवती को अमानवीय तरीके से पीटा बल्कि बाल पकड़कर गंगा में जबरन कई डुबकी लगवाई। जब प्रत्यक्षदर्शियों ने इसके बारे में पूछा तो युवती के पिता ने कहा कि उसकी बेटी है और परेशान है।

लोग मूक दर्शक बने रहे। इसी बीच मामला बढ़ न जाए तो पाखंडी युवती को लेकर दूसरे छोर पर चला गया। वहां युवती को पीट-पीटकर प्रेत आत्मा हटाने का नाटक कर रहा था। यह दृश्य केवल एक व्यक्ति या परिवार का नहीं था। संगम नोज पर एक बीन वाला भी ऐसे ही कर रहा था। बीच में बैठकर बीन बजाकर महिलाओं के सिर से भूत उतार रहा था। असपास मौजूद लोग बीन की धुन पर वैसे ही झूम रहे थे जैसे उनके ऊपर कोई साया हो।

कहां गई निगरानी टीम

ऐसा ही एक मामला कुछ साल पहले भी हुआ था। मामले को लेकर जब रिपोर्ट प्रकाशित हुई तो इस अमानवीयता पर ध्यान गया। ऐसे कृत्यों पर रोक लगाई गई। बाकायदा पुलिस टीम को तैनात किया जो निगरानी करेगी। सवाल उठता है कि आखिर यह निगरानी टीम गंगा दशहरा के दिन कहां थी। जबकि संगम तट पर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति गंगा पूजन के लिए आए थे। कोरोना महामारी में हजारों की भीड़ लगनी भी तय थी तो टीम इस वक्त कहां पर गायब हो गई थी।

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