नव भारतीय राजनीति का एक चमकता सितारा है अरविंद कुमार शर्मा,पी एम मोदी की कसौटी पर अत्यंत स्वस्थ और खरे भी उतरेंगे श्री शर्मा

वाराणसी : आज सहसा उत्तर प्रदेश की राजनीति में केंद्रीय धुरी के रूप में भेजे गये मोदी के प्रियदूत-केंद्रीय भाजपा के दिग्गज नेता अरविंद कुमार शर्मा उत्तर प्रदेश विधान परिषद हेतु निर्विरोध निर्वाचित किये गये।निर्वाचन के तत्काल उपरांत अत्यंत शीघ्रता से श्री शर्मा को राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के ठीक बगल में भूतपूर्व मुख्यमंत्री श्री राजनाथ सिंह का पूर्व आवास ४ कालीदास मार्ग आवंटित करने की खबर है।

टीम मोदी के रत्न -भाजपा नेता अरविंद शर्मा आरंभ से ही मोदी से स्वार्थ नहीं-सिद्धांत के आधार पर अत्यधिक निकट से जुडे़ रहे। आतंकी शोहराबुद्दीन इंकाउंटर हो -या कथित देश की बेटी (#१०जनपथ) आतंकी इशरत जहां का इंकाउंटर रहा हो -१०जनपथ प्रायोजित साबरमती रेल हादशा रहा हो -या गोधरा का साम्प्रदायिक दंगा -श्री शर्मा ने अपने तत्कालीन मुख्यमंत्री और राष्ट्रहित में प्रत्येक प्रतिकूल स्थिति/परिस्थिति में स्वयं को सिद्ध किये। ऐसा भी समय रहा जब गांधी परिवार (श्रीमती गांधी) २००४ से २०१४ तक केंद्रीय सत्ता में अत्यंत बलशाली था,मोदी का कट्टर विरोधी था …जीवन हानि भी हो सकती थी किंतु श्री शर्मा कभी भी एक इंच पीछे नहीं हटे -अपने तत्कालीन मुख्यमंत्री के कंधे से कंधा मिलाकर गुजरात से दिल्ली को कठोर चुनौती देते रहे। कभी भी स्वार्थ और अहंकार के वसीभूत नहीं हुये।

आज ऐसे माहौल में जब एक राजनेता पद प्राप्त करने हेतु स्वयं को भी बेचने से पीछे नहीं हट रहा -तब की स्थिति में श्री शर्मा को अपने गुजरात कार्यकाल में ही तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रसेवा में असीमित निष्ठा देख तभी राज्यसभा में जाने का आमंत्रण दिया था। किंतु तब श्री शर्मा ने यह प्रस्ताव विनम्रता पूर्वक यह कहते हुये अस्वीकार कर दिया था कि मा.मुख्यमंत्री जी आज आपको मेरे रूप में एक राजनेता नहीं अपितु एक प्रशासनिक अधिकारी की अत्यंत आवश्यकता है। मैं आज इस रूप में आपकी और राष्ट्र की सेवा अधिक बेहतर तरीके से कर सकता हूं। मैं एक अधिकारी के रूप में ही आपका सहयोगी रहूंगा। निरंतर बने रहे।

ना निष्ठा में कमी आई -ना गांधी परिवार के विरुद्ध साहस में -ना सेवा में कमी छोडें -ना ही भरोषा सिद्ध करने में। राष्ट्रहित में मात्र त्याग का परिचय दिये। तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का ना साथ छोडे़ -ना ही हांथ। आज वही नरेंद्र मोदी जब २०१४ में देश में एक अत्यंत लंबे समय की विकृत राजनीति के उपरांत -प्रचुर बहुमत से प्रधानमंत्री बने तो अरविंद शर्मा रूपी अपना गहरा विश्वास भी अपने साथ प्रधानमंत्री कार्यालय ले आये। अपना संयुक्त/अपर सचिव बनाये। नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद पर काम करने आये हैं पूर्व के राजनेताओं की भांति इंज्वाय करने नहीं आये हैं। देश तब भी स्तब्ध था -जब मोदी केंद्र सरकार (२०१९) में अपने ही विदेश सचिव रहे -एस जयशंकर को परराष्ट्र मंत्री नियुक्त किये।

देश/प्रदेश को आज भी वैसा ही आश्चर्य हो रहा है। जब एस जयशंकर परराष्ट्र मंत्री बने तब ८०% नागरिकों को उनकी जाति नहीं ज्ञात थी। कठोर विदेशनीति समझने वाले ३०% लोगों को बस इतना ज्ञात था कि जयशंकर इंडो-चाईना कूटनीति के धुरंधर हैं। मोदी को ऐसा ही एक योद्धा चाहिये था। केंद्र में अपना मंत्री बना दिये। भारत के समक्ष चीन आज वर्षों (डोकलाम) से घुटने के बल नतमस्तक पड़ा है। आज भी समय कुछ वैसा ही है। आज मोदी अपने तरकश से एक और वैसा ही तीर निकाल उत्तर प्रदेश भेज दिये। ऐसा इसलिये क्योंकि उत्तर प्रदेश में सत्यतः -विकृत कानून व्यवस्था -भ्रष्टाचार और निरंकुश ब्युरोक्रेशी -प्रदेश की श्रेष्ठगति और चरित्र हेतु एक अभिशाप बन चुका है। आज इसे नियंत्रित करने हेतु एक अत्यंत कुशाग्र और प्रत्येक स्तर पर गहन अनुभवी योद्धा की अत्यंत आवश्यकता थी। आम नागरिकों की प्रबल मांग थी। ऐसी परिस्थिति में अरविंद शर्मा के रूप में मोदी का यह अनुभव आधारित निर्णय अत्यंत सारगर्भित है। शत् प्रतिशत विश्वास है कि श्री अरविंद शर्मा उत्तर प्रदेश में भी पुनः अपने नेतृत्वकर्ता मोदी की कसौटी पर अत्यंत स्वस्थ और खरे उतरेंगे।

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