अगर मन थक गया तो दिक्कत होगी, खाली मत रहि‍ए, कुछ न कुछ नया सीखिए : RSS प्रमुख मोहन भागवत

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, “कोरोना की तीसरी लहर आने से पहले हमें इतनी तैयारी कर लेनी चाहिए, कि वह लहर आते ही उसी तरह खत्म हो जाए, जैसे चट्टान से टकराते ही समुद्र की बड़ी से बड़ी लहर भी चूर-चूर हो जाती है
देश में मौजूदा कोरोना संकट को लेकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने आज कई अहम बातें कही हैं. नई दिल्ली में पांच दिनों के ‘पॉजिटिविटी अनलिमिटेड’ कार्यक्रम के आखिरी दिन बोलते हुए मोहन भागवत ने अपने संबोधन के दौरान ये बताने की कोशिश की कि कोरोना की पहली लहर के बाद आम जनता, सरकार और प्रशासन से कहां चूक हुई और अब हम सभी को इस महामारी की चुनौती से कैसे निपटना चाहिए. उन्होंने बताया कि दृढ़ संकल्प, लगातार प्रयास और धैर्य के साथ भारतीय समाज कोरोना पर निश्चित ही विजय प्राप्त करेगा.

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, ”हम सभी, चाहे आम जनता हो या सरकार और प्रशासन, कोरोना की पहली लहर के बाद संतुष्ट हो गए. जबकि डॉक्टर इशारा कर रहे थे, लेकिन हम सभी संतुष्ट हो गए और इसीलिए आज हम सब कोरोना की दूसरी लहर के रूप में इस समस्या का सामना कर रहे हैं.” उन्होंने आगे कहा, अब तो आने वाले दिनों में कोरोना की तीसरी लहर की भी बात हो रही है, लेकिन हम सबको बजाय डरने के खुद को तैयार करने की जरूरत है.”

उन्होंने कहा, “पहली ल​हर के बाद हम गफलत में आ गए और अब तीसरी लहर आने की बात हो रही है. इससे अर्थव्यवस्था, रोजगार, शिक्षा आदि पर गहरा प्रभाव पड़ा है. आने वाले दिनों में अर्थव्यवस्था पर और असर पड़ सकता है, इसलिए इसकी तैयारी हमें अभी से करनी होगी. भविष्य की इन चुनौतियों की चर्चा से घबराना नहीं है बल्कि ये चर्चा इसलिए जरूरी है ताकि हम आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए समय रहते तैयारी कर सकें.

तीसरी लहर आते ही हो जाए खत्म

उन्होंने समझाते हुए कहा, “तीसरी लहर आने से पहले हमें इतनी तैयारी कर लेनी चाहिए, कि वह लहर आते ही उसी तरह खत्म हो जाए, जैसे चट्टान से टकराते ही समुद्र की बड़ी से बड़ी लहर भी चूर-चूर हो जाती है. ये कोरोना महामारी मानवता के सामने एक चुनौती है और भारत को एक मिसाल कायम करनी है. हमें गुण-दोषों की चर्चा किए बिना एक टीम के रूप में मिलकर काम करना चाहिए. आज जो चल रहा है, वो सब तो हम बाद में भी कर सकते हैं, लेकिन फिलहाल तो हम सबको एक टीम के रूप में काम करके और अपने काम में तेजी लाकर ही इस चुनौती से पार पा सकते हैं.

‘अंतिम नहीं है सफलता और असफलता’

कार्यक्रम में आगे बोलते हुए भागवत ने कहा, ‘हालात विपरीत हैं, लेकिन ये भी निश्चित है कि हम जीतेंगे. हमें हर हालात में सकारात्मक रहना होगा और मौजूदा स्थिति में खुद को संक्रमण से बचाने के लिए सावधानियां बरतनी होंगी और खुद को सुरक्षित रखना होगा. वर्तमान में हमारे सामने जो हालात हैं, उसे देखते हुए तर्कहीन बयान देने से बचना चाहिए. ये हमारी परीक्षा का समय है लेकिन हमें एकजुट रहना होगा और इस समय अपने सारे मतभेद भुलाकर एक टीम की तरह काम करना होगा. सफलता और असफलता अंतिम नहीं है, जारी रखने का साहस मायने रखता है. हमें जीत का संकल्प लेकर इस चुनौती से लड़ना है.”

‘अगर मन थक गया, तो दिक्कत होगी’

उन्होंने कहा, “वर्तमान पर‍िस्‍थ‍ित‍ि कठ‍िन है और नि‍राश करने वाली है, लेक‍िन हम सभी को नकारात्‍मक नहीं होना है और मन को भी नकारात्‍मक नहीं रखना है. हम जब तक जीत न जाएं, तब तक लड़ना है.” उन्होंने फिर उदाहरण देते हुए बताया, “दरअसल, मुख्‍य बात मन की है, अगर मन थक गया, तो दिक्कत होगी, जैसे सांप के सामने चूहा अपने बचाव के लि‍ए कुछ नहीं करता. हमें ऐसा नहीं होने देना है. वर्तमान समय न‍िराशा का नहीं, बल्कि लड़ने का है.”

उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का उदाहरण देते हुए कहा, “ये समय रोजाना हमारे मन को उदास और कड़वा बनाएगा. लेकिन ये भी सच है कि सारी समस्‍याओं को पारकर सभ्यता आगे बढ़ी है. समाज की च‍िंता और प्‍लेग के मरीजों की सेवा करते-करते हेडगेवार के माता-प‍िता चले गए, तो क्‍या उनका मन कड़वाहट से भर गया, ऐसा नहीं है, बल्‍कि‍ उन्होंने आत्‍मीयता का संबंध बनाया.”

उन्होंने कहा, “इसी तरह जब कोई भी विपत्ति आती है तो हमारी प्रकृति‍ क्‍या है? भारत के लोग जानते हैं क‍ि पुराना शरीर रोगी हो गया और अब वह उपयोगी नहीं रहा. जैसे हम कपड़े बदलते हैं, वैसे ही हमें शरीर भी दूसरा धारण करना है. ऐसे में ये सब हमें द्वारा नहीं सकता, हमें जीतना है. सामने जो संकट है, उसे चुनौती मानकर संकल्‍प कर उससे लड़ना है. जब तक जीत न जाएं, तब तक लड़ना है.

‘पहले भी आईं कई विपत्तियां और हम जीते भी’

भगवत ने कहा, “खुद को सजग, सक्रिय और स्वस्थ रखते हुए धैर्य और अनुशासन के साथ हमें सेवा कार्यों में जुटना चाहिए. कोरोना के मरीजों को अस्पतालों में बिस्तर, ऑक्सीजन आदि उपलब्ध हों, इसके प्रयास करने चाहिए. सेवा कार्यों में लगे संगठनों को सहयोग करना चाहिए. अपने आसपास के उन परिवारों की चिंता करनी चाहिए जिन पर आर्थिक संकट है. अपयश को पचा कर लगातार आगे बढ़ने की हिम्मत रखनी होगी. भारत एक प्राचीन राष्ट्र है और इससे पहले भी कई विपत्तियां आईं, लेकिन हर बार हमने उन पर विजय प्राप्त की है, इस बार भी हम विजय प्राप्त करेंगे.”

‘खाली मत रहि‍ए कुछ न कुछ नया सीखिए’

उन्होंने आगे कहा, “देर से जागे कोई बात नहीं, लेकिन अब हमें आगे बढ़ने की कोशिश करनी चाहिए. ऑनलाइन सीखने की बहुत व्यवस्था है. खाली मत रहि‍ए कुछ न कुछ नया सीखते रहिए, परिवार या बच्‍चों से बातें कीजिये. इसी के साथ, जो भी आ रहा है उसको परखकर लेना चाह‍िए. सावधानी हटती है तो दुर्घटना घटती है. हम सब कुछ खुद के अनुभव और वैज्ञानि‍क परीक्षण के आधार पर लें. हमारी तरफ से बे-स‍िर पैर की बात न जाएं. जैसे आयुर्वेद के पीछे तर्क है, इसलिए उसे अपनाने कोई द‍िक्‍कत नहीं है, लेकिन उससे सभी को लाभ हो, ऐसा भी नहीं है. ऐसे में सावधानी रखकर अपना इलाज और आहार का सेवन करना चाह‍िए.”

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