लंकेश /रावण के जन्म के साथ हुआ रामलीला का आगाज : मानस की चौपाइयों से गूंजा रामनगर वाराणसी

रमेश चन्द्र पाण्डेय वाराणसी

लंकेश /रावण के जन्म के साथ हुआ रामलीला का आगाज : मानस की चौपाइयों से गूंजा रामनगर

वाराणसी : (काशी) रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला की सुरुआत के बाद आज लंकेश( रावण) के जन्म के साथ ही रामलीला का आगाज हो गया ।सदियों की परंपरा काशी रामनगर में रामलीला के औपचारिक शुरूआत में शाम होते ही सुरु हो गयी ।पूर्व में ही मंच सज कर तैयार रहा । काशी व आस पास के जिलों के लोग भी इस अनुपम क्षण को अपने नैनों में कैद करने के लिए उतावले दिखे ।अनन्त चतुर्दशी पर आज श्री गणेश के शंखनाद के साथ लँकाधिपति महाराज रावण के जन्म के साथ ही काशी की विश्व प्रसिद्ध रामलीला का आगाज का प्रारम्भ हो गया। रामनगर स्थित रामबाग से हर हर महादेव व जय श्री राम के उद्धघोष के साथ ही रामनगर राम लीला मंच पर पँचलाइट व जगमगाती महताबी रोशनी में दो वर्ष बाद रामलीला अपनी परम्पराओं को दोहराती नजर आयी । माहभर तक चलने वाली काशी की रामलीला की परम्पराओं से निहाल रहेगी , तो लीला प्रेमीयों से रामनगर बनारस की धरती भी त्रेतायुगीन पात्रों से जीवंत नजर आएगी ।रामनगर की रामलीला के आज पहले दिन के आयोजन में रावण जन्म दिग्विजय, क्षीरसागर की अनुपम झांकी,देव स्तुति व आकाशवाणी का मंचन हुआ । लिहाजा, सुबह ही पात्रों का रिहर्सल पूर्ण हो गया था। तो परम्पराओं के निर्वहन के क्रम में रामनगर के किले से पात्रों का चयन स्वयं काशी नरेश के द्वारा होता है । लीला स्थल पर काशी नरेश महाराज अनन्त नारायण सिंह के आगमन पर किले से निकलते ही हर – हर महादेव के साथ ही लीला स्थल पर रामचरित मानस गान की विधि पूर्वक परम्पराएं, बिना किसी माइक , साउंड , इलेक्ट्रिक,लाउडस्पीकर , सिर्फ सावधान सुनो , सुनो सुनो, पाहिमाम, पाहिमाम ,से पूर्ण होती है ।इसी के साथ काशी का एक और लक्खा मेला रामनगर में एक माह के लिए त्रेतायुगीन श्रीराममय में डूब जाएगा । देश विदेश से आने वाले श्रद्धालु भक्तों का अनवरत दो पहर बाद से मेला स्थल पर पहुँचना शुरू हो हो जाएगा ।।

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