यूपी के प्राइवेट स्कूलों में फ़ीस सम्बन्धी आदेश जारी बढ़ सकती है प्राइवेट स्कूल की फीस

सतीश कुमार मौर्य की रिपोर्ट

विषय- कोरोना वायरस (कोविड-19) की दरों में प्रभावी रूप से कमी होने के दृष्टिगत प्रदेश में संचालित समस्त शिक्षा बोर्डों के समस्त विद्यालयों द्वारा ली जाने वाली शुल्क के संबंध में।

महोदय, उपरोक्त विषयक शासन के पत्रांक- 32/15-7-2022-1 (20)/2020 दिनांक 07.01.2022

का संदर्भ ग्रहण करने का कष्ट करें, जिसके द्वारा कोरोना वायरस (कोविड-19) के कारण उत्पन्न

असाधारण परिस्थितियों के दृष्टिगत शैक्षणिक सत्र 2022-23 हेतु प्रदेश में संचालित समस्त शिक्षा

बोर्डों के समस्त विद्यालयों द्वारा ली जाने वाली शुल्क को नियमित किये जाने के आदेश निर्गत

किये गये थे।

2 कोविड-19 के कारण उत्पन्न आसाधरण परिस्थितियों के दृष्टिगत आपदा प्रबन्धन अधिनियम, 2005 के अन्तर्गत घोषित लॉकडाउन के कारण कुछ छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के रोजगार प्रतिकूलरूप से प्रभावित होने तथा ऐसे छात्रों के अभिभावकों को शुल्क जमा किये जाने में कठिनाईयों का सामना करने के दृष्टिगत छात्रहित एवं जनहित में प्रथम बार शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिये शुल्क वृद्धि न किये जाने एवं शैक्षणिक सत्र 2019 में नव प्रवेशित तथा प्रत्येक कक्षा के लिये लागू की गयी शुल्क संरचना के अनुसार ही शैक्षणिक सत्र 2020-21 में छात्र छात्राओं से शुल्क लिये जाने के निर्देश शासनादेश संख्या-756/15-7-2020-1 (20)/2020 दिनांक 27.04.2020 द्वारा निर्गत किये गये।

कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण के दृष्टिगत उपरोक्त परिस्थितियों के कारण आपदा प्रबन्धन अधिनियम, 2005 लागू होने तथा उपरोक्त परिस्थितियां विद्यमान होने के कारण अग्रेत्तर छात्रहित एवं जनहित में शैक्षणिक सत्र 2021-22 हेतु शुल्क वृद्धि न किये जाने एवं 2019-20 की शुल्क संरचना के आधार पर ही शुल्क लिये जाने के आदेश शासनादेश संख्या- 11 / 2021/1040 / 15-7-2020-1(20)/2020 दिनांक 20.05.2021 द्वारा निर्गत किये गये।

कोविड-19 के प्रकरणों की संख्या में वृद्धि तथा कोविड के नवीन प्रतिरूप ऑमिकान के संक्रमण के केसेज में वृद्धि के कारण उत्पन्न परिस्थितियों के दृष्टिगत शासनादेश संख्या – 32/15-7-2022-1 (20) / 2020 दिनांक 07.01.2022 द्वारा छात्रहित एवं जनहित में शैक्षणिक सत्र 2022-23 में शुल्क वृद्धि न किये जाने के आदेश निर्गत करते हुये शैक्षणिक सत्र 2019-20 की शुल्क संरचना के आधार पर शुल्क लिये जाने के आदेश निर्गत किये गये।

यूपी के स्ववित्त स्कूलों में फ़ीस सम्बन्धी आदेश जारी ।

यूपी के स्ववित्त स्कूलों में फ़ीस सम्बन्धी आदेश जारी ।

छात्रहित एवं जनहित में शैक्षणिक सत्र 2020-21 एवं 2021-22 में शुल्क वृद्धि के शासनादेश जब निर्गत किये गये थे तत्समय आपदा प्रबन्धन अधिनियम, 2005 लागू था एवं घोषित लॉकडाउन के कारण अनेक अभिभावकों के रोजगार प्रतिकूलरूप से प्रभावित हुये थे तथा वे शुल्क देने में सक्षम नहीं थे तथा इसी प्रकार वर्तमान शैक्षणिक सत्र में शुल्क वृद्धि न किये जाने का शासनादेश दिनांक 07.01.2022 को जब निर्गत किया गया था, तत्समय कोविड-19 की तीसरी लहर प्रभावी थी विद्यालयों में भौतिक रूप से पठन-पाठन बंद था तथा कोरोना केसेज की दर में वृद्धि हो रही थी। सम्प्रति कोविड-19 के संक्रमण की दर एवं एक्टिव की संख्या में कमी आने से परिस्थितियां सामान्य की ओर लौट रहीं है।

4 अतः उपरोक्त के दृष्टिगत मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि शासन द्वारा सम्यक विचारोपरान्त जनहित में तथा विद्यालयों का सुचारू / नियमित संचालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रदेश में संचालित समस्त शिक्षा बोर्डों के वित्त विहीन विद्यालयों द्वारा शैक्षणिक सत्र 2022-23 के लिये ली जाने वाली शुल्क के सम्बन्ध में निम्नलिखित निर्णय लिए गए हैं:

  1. शैक्षणिक सत्र 2022-23 के लिये शुल्क वृद्धि न किये जाने विषयक शासनदेश संख्या – 32/ 15-7-2022-1 (20)/2020, दिनांक 07.01.2022 को अवकमित किया जाता है।
  2. विद्यमान छात्रों के लिये शुल्क वृद्धि वर्ष 2019-2020 की शुल्क संरचना को आधार वर्ष के रूप में मानते हुये उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय ( शुल्क विनियमन) अधिनियम 2018 की धारा-4 (1) के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2022-23 में नियमानुसार शुल्क वृद्धि की जा सकती है। अधिनियम की धारा 4 (1) में उल्लिखित ” किन्तु शुल्क वृद्धि, नवीनतम उपलब्ध वार्षिक प्रतिशत बढ़े हुये उपभोक्ता मूल्य सूचकांक + छात्रों से वसूल किये गये 5 प्रतिशत शुल्क से अधिक नहीं होगी” के सम्बन्ध में यह स्पष्ट किया जाता है कि शैक्षणिक सत्र 2022-23 में वार्षिक वृद्धि की गणना हेतु नवीनतम् उपभोगता मूल्य सूचकांक को आधार माना जाये तथा वर्ष 2019-20 की शुल्क संरचना को आधार मानते हुए वर्ष 2019-20 में छात्रों से वसूल किए गए शुल्क के 05 प्रतिशत से अधिक की शुल्क वृद्धि न की जाय शैक्षणिक सत्र 2022-23 हेतु शुल्क वृद्धि की गणना किए जाते समय वर्ष 2020-21 एवं 2021-22 में शुल्क वृद्धि की काल्पनिक गणना कदापि न करके उक्त फार्मूले में जोड़ी न जाय ।

उदाहरण स्वरूपः शैक्षणिक वर्ष 2019-2020 में ‘x’ वार्षिक शुल्क होने की दशा में शैक्षणिक सत्र 2022-23 में शुल्क वृद्धि नवीनतम उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर वार्षिक वृद्धि की गणना की जाय छात्रों से वर्ष 2019-2020 में लिये गये वार्षिक शुल्क ‘x’ के 5 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि न की जाय)

  1. वर्ष 2019-2020 की शुल्क संरचना को आधार वर्ष के रूप में मानते हुये शैक्षणिक सत्र 2022-23 में नव प्रवेशित छात्रों से उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम 2018 की धारा 4(2) के अंतर्गत नियमानुसार शुल्क सुनिश्चित की जाय।

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