प्रदेश के समस्त जनपदों के गोवंश / महिषवंश पशुओं के अन्य जनपदों में परिवहन पर पूर्णतः प्रतिबन्ध

पशुओं की लम्पी स्किन बीमारी की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु विभागीय उत्तरदायित्वों का निर्धारण:

जिला प्रशासन के उत्तरदायित्व

1.1 सीमावर्ती राज्य यथा राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखण्ड एवं मध्य प्रदेश से उ0प्र0 के रास्ते में पड़ने वाली समस्त बार्डर चेकपोस्ट व पुलों पर निगरानी सक्रिय किये जाने के साथ-साथ गोवंश / महिषवंश के प्रदेश में प्रवेश को पूर्णयता प्रतिबन्धित किया जाय।

1.2 प्रदेश के समस्त जनपदों के गोवंश / महिषवंश पशुओं के अन्य जनपदों में परिवहन पर पूर्णतः प्रतिबन्ध लगाया जाय, विशेष कर पश्चिम से पूर्व की ओर जा रहें पशुओं को हाईवे, चेकपोस्ट / पुलों आदि पर निगरानी करते हुये पूर्ण रूप से रोका जाय ।

1.3 यदि किसी गो आश्रय स्थल अथवा गोशाला में इक्का-दुक्का केस मिलें, उन्हें वहीं पृथक से कुछ दूरी पर शेड बनाकर संरक्षित किया जाय तथा प्रोपर सेनेटाईजेशन कराया जाय। यह भी सुनिश्चित किया जाय कि स्वस्थ एवं रोगी पशुओं के गोसवकों की पृथक टीमें बनाकर सेवा सुश्रूषा की जाय तथा डॉक्टर एवं पैरावेट मास्क सेनेटाईजर तथा हैण्ड ग्लब्स का उपयोग करते हुए उपचार करें। यदि किसी गो आश्रय स्थल एवं गोशाला में अधिक संख्या में पशु प्रभावित हैं तो ऐसे पशुओं को निकटवर्ती डेडीकेटेड गो चिकित्सा स्थल चिन्हित करते हुए वहां शिफ्ट किया जाए। जिले के ऐसे चुनिन्दा चिन्हित डेडीकेटेड गो चिकित्सा स्थलों के लिए जिलाधिकारी स्तर से प्रभारी प्रशासनिक अधिकारी एवं पशु चिकित्साधिकारी को तैनात किया जाय। अन्य राज्यों में इसके अच्छे परिणाम आये हैं।

1-4 जनपद में सेक्टर एवं जोनल व्यवस्था लागू की जाय तथा जिलाधिकारी द्वारा सेक्टर एवं जोनल अधिकारी नियुक्त करते हुये निरंतर अनुश्रवण किया जाय।

1.5 निजी गोशालाओं के प्रबन्धकों, उनमें कार्यरत पशु चिकित्सकों एवं अन्य कर्मचारियों के साथ जिलाधिकारी बैठक आहूत कर उन्हें भी गाइडलाइन का पालन करने हेतु निदेशित करें तथा “क्या करें क्या न करें” के बारे में विधिवत अवगत कराया जाय। यह अवश्य सुनिश्चित किया जाय कि समस्त गोशालाओं एवं समस्त गोआश्रय स्थलों में बाहरी अगन्तुकों (VISITORS) का प्रवेश पूर्णतया प्रतिबन्धित हो।

1.6 निदेशक, रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र के आदेश दिनांक 22.08.2022 द्वारा गोटपॉक्स वैक्सीन निर्माता कम्पनियों द्वारा निजी व्यक्तियों / संस्थाओं को विपणन पूर्णतः प्रतिबन्धित कर दिया गया है। इसका क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाय।

भारत सरकार के शासनादेश संख्या- K-11053/69/2019 LH दिनांक- 29.07.2022 द्वारा निर्गत दिशा निर्देश तथा अपर मुख्य सचिव पशुधन उ०प्र० शासन के आदेश संख्या-1593 / सैंतीस-2-2022 दिनांक-23.08.2022 द्वारा निर्गत आदेशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाये।

पशुओं की लम्पी स्किन बीमारी की रोकथाम एवं नियंत्रण विभागीय उत्तरदायित्वों का निर्धारण:

ग्राम विकास विभाग के उत्तरदायित्व

2.1 प्रदेश में अग्रिम आदेशों तक गोआश्रय स्थलों में कोई नया पशु संरक्षित न किया जाय। यह आदेश नगर निकाय, जिला पंचायत, ग्राम पंचायत, निजी अथवा स्वयं सेवी संस्था द्वारा संचालित गोआश्रय स्थल / गोशाला पर लागू होगा।

2.2 यदि किसी पशुपालक के निजी स्वामित्व के इक्का-दुक्का पशु रोगग्रस्त है तो उन्हें वहीं कुछ दूर पर आइसोलेट किया जाय एवं उपचार के साथ-साथ सेनेटाईजेशन व अन्य पशुओं के लिए निरोधात्मक कार्यवाही प्रारम्भ की जाय। उक्त परिवार के सदस्य आस-पास के अन्य स्वस्थ पशुओं के निकट न जायें।

2.3 जिन ग्रामों एवं क्षेत्रों में रोग का प्रभाव / प्रकोप हो, वहां से गोसेवकों को गोआश्रय स्थलों पर काम पर न बुलाया जाए।

2.4 वेस्ट मैनेजमेन्ट की समुचित व्यवस्था की जाय प्रभावित पशुओं के गोवर एवं अन्य उत्सर्जन पर चूना / DISINFECTANT का छिड़काव कराया जाय।

25 यदि अपरिहार्य कारणों से किसी पशु की मृत्यु हो जाती है तो प्रोटोकॉल के अनुसार पशु शव का परिवहन सम्मानजनक तरीके से ढक कर निकटवर्ती चिन्हित स्थल पर DEEP BURIAL सुनिश्चित किया जाय। इसमें किसी तरह की लापरवाही न बरती जाय।

भारत सरकार के शासनादेश संख्या- K-11053/69/2019 LH दिनांक 29.07.2022 द्वारा निर्गत दिशा निर्देश तथा अपर मुख्य सचिव पशुधन उ०प्र० शासन के आदेश संख्या-1593/ सैंतीस-2-2022 दिनांक 23.08.2022 द्वारा निर्गत आदेशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाये।

पशुओं की लम्पी स्किन बीमारी की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु विभागीय उत्तरदायित्वों का निर्धारणः

पशू पालन विभाग का दायित्व

3.1 पशुपालकों / कृषकों, पशुधन प्रसार अधिकारियों एवं पैरावेट्स हेतु सरल भाषा में गाइड लाइन जारी की गई है जिसका वृहद स्तर पर प्रचार-प्रसार कराया जाय इसी में “क्या करें क्या न करें भी संलग्न किया गया है, जिसे स्थानीय स्थल पर आवश्यकतानुसार संशोधित भी किया जा सकता है।

3.2 प्रभावित एवं समीपवर्ती जिलों के अन्तर्गत समस्त बडी गोशालाओं / गो संरक्षण केन्द्रों एवं ऐसे रिंग क्षेत्रों जहाँ पर अभी इस रोग का प्रभाव नहीं है, में टीकाकरण समेत समस्त एहतियाती उपाय किये जाय

3.3 रोग की सूचना प्राप्त होने पर तत्काल रोगी पशु की चिकित्सा व्यवस्था की जाय तथा पशु के स्वस्थ होने तक नियमित रूप से उसकी देखभाल की जाय।

3.4 यह सुनिश्चित किया जाय कि उपचार हेतु समस्त आवश्यक औषधियां उपकरण तथा अन्य SUPPLEMENTRY NUTRITION व वाहन की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध रहें।

3.5 उपचार के प्रोटोकॉल का पूर्णतः अनुपालन किया जाय तथा भारत सरकार द्वारा निर्गत प्रोटोकॉल के अनुसार ORAL औषधियां और घाव पर टॉपिकल दवाई आदि का प्रयोग किया जाय। INJECTABLE औषधियाँ गम्भीर रोग में भारत सरकार की ADVISORY के अनुसार चिकित्सकीय परामर्श के उपरान्त प्रयोग किया जाय।

3.6 लम्पी स्किन डिजीज के प्रसार को दृष्टिगत रखते हुए आगरा, अलीगढ़, सहारनपुर, मेरठ, मुरादाबाद एवं बरेली मण्डल अति सम्वेदनशील की श्रेणी में है। प्रथम चरण में उक्त मण्डलों में लम्पी स्किन डिजीज की रोकथाम हेतु गॉटपॉक्स वैक्सीन लगाये जाने पर विशेष ध्यान दिया जाना उचित होगा।

3.7 कानपुर, लखनऊ एवं झांसी मण्डल सम्वेदनशील की श्रेणी में हैं। द्वितीय चरण में उक्त मण्डलों में गॉटपॉक्स वैक्सीन लगाये जाने के पश्चात प्रदेश के शेष मण्डलों में वैक्सीन लगाया जाना उचित होगा।

3.8 गोटपॉक्स वैक्सीन टीकाकरण कार्यक्रम कोविड टीकाकरण अभियान की भांति मिशन मोड में चलाया जाये। टीकाकरण कार्यक्रम में बड़ी गोशाला, निराश्रित गोआश्रय स्थल को प्राथमिकता देते हुये इसी के साथ प्रभावित क्षेत्रों का रिंग टीकाकरण कराया जाय।

3.9 जनपद से ग्राम स्तर तक टीकाकरण हेतु समुचित रूप से कोल्डचेन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाय।

पशुओं की लम्पी स्किन बीमारी की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु विभागीय उत्तरदायित्वों का निर्धारण:

पंचायती राज विभाग के उत्तरदायित्व

4.1 यह एक विषाणु जनित रोग है जो कतिपय मक्खी, मच्छर आदि से फैलता है, अतः कीटनाशक का छिड़काव, फॉगिंग, साफ-सफाई, स्वच्छता युद्ध स्तर पर सुनिश्चित की जाय । यह कार्य ग्रामीण क्षेत्र में पंचायती राज / ग्राम्य विकास विभाग तथा नगरीय क्षेत्रों में नगर विकास विभाग द्वारा सम्पादित किया जाय इस संबंध में आवश्यक रसायन यथा SODIUM HYPOCHLORITE आदि उपकरण तथा बजट की उपलब्धता तत्काल सुनिश्चित की जाय ।

भारत सरकार के शासनादेश संख्या – K-11053/69/2019 LH दिनांक- 29.07.2022 द्वारा निर्गत दिशा निर्देश तथा अपर मुख्य सचिव पशुधन उoप्रo शासन के आदेश संख्या – 1593 / सैंतीस -2-2022 दिनांक- 23.08.2022 द्वारा निर्गत आदेशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाये ।

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