पेयजल के जुगाड़ में दूर दूर भटक रहे ग्रामीण

आत्मा प्रसाद त्रिपाठी की रिपोर्ट

राजगढ़/ मिर्जापुर : करोड़ों रुपए का भारी-भरकम बजट खर्च कर ग्रामीण अंचलों में पर्याप्त पेयजल आपूर्ति का दावा सरकार की तरफ से किये जाने के वावजूद भी राजगढ़ विकास खंड के जंगल व सुदूर पहाड़ी क्षेत्र के गांवों में रहने वाले लोग सुबह होते ही पीने के लिए पानी का जुगाड़ करने के लिए दूर दूर भटकना पड़ रहा है।

तपती गर्मी में गला तर करने के लिए ग्रामीणों का पूरा दिन पानी का जुगाड़ करने में बीत रहा हैं। तेज धूप व कड़ाके की तपन के कारण जलस्तर नीचे खिसकने से गावो में लगे अधिकतर हैंडपम्पो से पानी के बजाय हवा निकल रही है।जिससे अपनी प्यास बुझाने के फिराक में लगे ग्रामीण समझ नही पा रहे हैं कि आखिर पेयजल संकट से छुटकारा मिलेगा भी या नही।


पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण 83 ग्राम पंचायतों वाले राजगढ़ ब्लाक के कई गांवों में पेयजल संकट गहरा गया है।लहौरा ग्राम पंचायत के पुरैनिया पुरवा मुसहर बस्ती के चंद्रेश, संतोष,गुड्डी, दरोगा,शांति ने बताया कि 50 से 60 घरों वाली वस्ती में चार हैंडपम्प लगाए गए हैं।जिसमे सभी खराब हो चुके है।जिससे बस्ती के लोगो को लगभग 500 मीटर दूर से कुए से पानी भरना पड़ा रहा है।

वही गांव के पंचायत भवन के पास रिबोर कराने के लिए नवंबर माह में ही एक लाख सत्ताईस हजार रुपये बिना बोरिंग कराये ही निकाल लिए गए थे।ग्रामीणों द्वारा अधिकारियों से शिकायत किये जाने पर किसी तरह मई महीने में बोरिंग कराया गया।जिससे साफ तौर जाहिर हो रहा है पेयजल समस्या को लेकर कर्मचारी गम्भीर नही है और अपना जेब भरने में लगे हुए हैं।


वही जंगलों व पहाड़ो से सटे सरसो सेमरी ग्राम पंचायत के कोटिया पुरवा निवासी जय सिंह, रज्जन, पिन्टू व रामविलास ने बताया कि 70 से 80 घरों वाली इस बस्ती में पेयजल आपूर्ति के लिए तीन हैंडपम्प लगाए गए हैं।जिसमे केवल एक हैंडपम्प से ही पानी निकल रहा है।जिससे ग्रामीणों को पेयजल के जुगाड़ के लिए सौ से पांच सौ मीटर दूर से किसानों बोरिंग से डिब्बो, गगरी व बाल्टी में पानी भरकर साइकिल,ठेला व सिर पर लादकर लाना पड़ रहा है।

वही बिजली कटने के बाद पानी नही मिल पाता।जिससे ग्रामीण रात से ही बोरिंग पर पानी भरने लिए पहुच जाते हैं।पेयजल संकट से जूझ रहे गरीब तपके के लोगो का कहना है कि पेट की भूख मिटाने के लिए दिनभर कड़ी मेहनत व खटनी करनी पड़ती है और घर पहुचने के बाद गला तर करने के लिए पानी का जुगाड़ करना पड़ता है।जिससे आराम न मिलने पर लोग बीमार भी पड़ रहे है।हालांकि पेयजल आपूर्ति के लिए सेमरी गांव में एक टैंकर लगाया गया है।परंतु ग्रामीणों की प्यास बुझाने में टैंकर का पानी ऊट के मुह में जीरा के समान साबित हो रहा है।


जबकि ब्लाक की तरह से पेयजल आपूर्ति के लिए जारी किये गए आकड़ो में 83 ग्राम पंचायतों में कुल 4674 हैंडपम्प,247 कुआ व 96 सोलर पम्प लगाए गए हैं।वही दर्जनों गांव में टैंकर द्वारा पेयजल आपूर्ति की जा रही है।पेयजल संकट से निपटने के लिए ब्लाक मुख्यालय में अलग से काउंटर बनाये गए है तथा हेल्पलाइन नम्बर भी जारी किए गए।

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