डॉक्टरों ने तो मानव धर्म को ही लूट का जरिया बना लिया

मरीज़ मरता है तो मरे कोई इनका रिश्तेदार थोड़ी है

कृष्णा पंडित की कलम से

जिला वाराणसी का कई सारे निजी अस्पताल जिनकी आदत लूट घसौट में शुमार है आए दिन असहाय लाचार मरीज को परिजन के सहारे वसूली का अमली जामा पहना रहे हैं ज्यादातर मामलों में लापरवाही Dr की नासमझी और जानबूझ कर कई डुब्लिकेट दवा का वितरण मरीज के जान पर आ बनती है… सैकडो फर्जी दवा कम्पनी अपनी उपस्थिति दर्ज करा कर लूट का सामान बना कर जहर फ़ैला रही है !

ज़िम्मेदार हुक्मरान नोटों की वसूली कर कलयुग की इमारत पर बुलंदी की तस्वीर लिख रहे हैं

आम आदमी का कसूर क्या गरीबी या लाचारी

निजी अस्पताल के मेडिकल हॉल में यदि सत्यता से जांच किया जाए तो 70% से ज्यादा मेडिसिन कंपनी जो डुप्लीकेट दवा का सप्लाई करती हैं अस्पतल के मेडिकल हॉल पर उपलब्ध होता है जिनकी कीमत ओरिजिनल दवा की कंपनी से लगभग बराबर व रैपर भी समान होता है जिससे कि आम आदमी को दोनों में अंतर स्पष्ट नहीं हो पाता डॉक्टर साहब दवा लिखते हैं लिखने के बाद कमीशन के चक्कर में ओरिजिनल और डुप्लीकेट में अंतर स्थापित करना भूल जाते हैं !फिर मरीज का धीरे-धीरे कर मरने के लिए मरण सैया तैयार कर उसकी जीवन की कहानी कलयूगी भगवान के रूप में गढ़ रहे हैं पूर्व के दिनों में जब प्लेटलेट की कमी की जगह जूस मरीज को चढ़ा दिया गया तो कैसे विश्वास किया जाए कलयुगी डॉक्टरों पर !

मरीज का इलाज ठीक ढंग से हो ना हो ,पैसे पहले जमा करो

बदहाल परिजन किसी तरह कैसे भी पैसा जमा कर देते हैं लेकिन इनके खेल में और चंगुल के शिकार हो रहे हैं ! कई ऐसे केसेस और मामले हैं जिसमें डॉक्टरों की लाइसेंस तक निरस्त करने का मामला न्यायालय में चल रहा है !

मरीज को सही ईलाज न मिलने के कारण मौत को गले लगाना पड़ता है

अनपढ़ गवार नासमझ मेडिकल जानकारी ना रखने वाले अस्पताल संचालक पैसे के दम पर डॉक्टर हायर करते हैं और फिर शानदार बिल्डिंग और सुविधा संसाधन के साथ लोगों को प्रचार-प्रसार के माध्यम से अपने यहां मरने के लिए भर्ती करवाकर लूट की डायरी बनाते हैं ! शानदार भवन देख कर के लोग अस्पताल में दाखिल होते हैं वहीं आज के भगवान रूपी डॉक्टर जो सिर्फ मात्र अपनी पेशा के दौरान वसूली व लूटपाट ही जानते हैं ना कि मरीजों का ठीक तरीके से देखभाल कर इलाज करना, कुछ ऐसा ही वाक्या वाराणसी के कई नामी गिरामी हॉस्पिटल में घट रहा जो शर्मनाक ही नहीं बल्कि डॉक्टरी पेशा के लिए बहुत ही घृणित है !

4 दिन की सख्ती फिर चांदी की लूट

बड़े साहब खूब जागरूक हुए तो 4 दिन की सख्ती कर दी चार लाइसेंस निरस्त करते हैं फिर क्या फिर तो धौंस जमा कर वसूली के लिए बड़ा रकम तैयार हो जाता है और फिर मडवाली के खेल में आम आदमी का जानवरों से बदतर भी हालत बना कर मरने को मजबूर करते है आखिर इतनी सारी डुप्लीकेट कंपनियों का दवाई इतनी धड़ल्ले से मार्केट में कैसे बिक रहा ..?? बिना किसी लाइसेंस और सेटिंग के आधार पर बनारस में हजारों दुकान संचालित हो रहा है कई अस्पताल जहां कोई भी एमबीबीएस एमडी जैसा डॉक्टर ना होना बीएएमएस की उपस्थिति में सर्जरी तक कर दी जा रही है क्या वाराणसी के जिलाधिकारी व चिकित्सा अधिकारी पूरी तरीके से अनभिज्ञ हैं या जानना नहीं चाहते दूसरी बात मुख्यमंत्री एक तरफ बुलडोजर चला रहे हैं ऐसे मनचलों के अस्पताल और 302 आईपीसी की धारा में उनको सबक सिखाने के लिए जेल भेज रहे हैं ! वही मनमानी करने वाले अपनी रसूख का फायदा उठाकर लूट का हथियार बनाते हुए आम आदमी का शिकार कर रहे हैं !
वाराणसी के अलग-अलग थाना क्षेत्र में कई सारे झोलाछाप डॉक्टर जो निजी अस्पताल मरीजों के जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं और तो और पूरे अस्पताल में केवल मात्र बीएएमएस डॉक्टर की डिग्री धारक ही उपस्थित हैं यही नहीं कई ऐसे अस्पताल है जहां एमबीबीएस एमडी का काम माननीय झोलाछाप महोदय ही कर रहे हैं इसकी पूरी जानकारी सीएमओ को भी है लेकिन साहब इतने व्यस्त हैं कि उनको दुनियादारी से क्या लेना जो मरता है मरीज तो मरे, ऐसा ही कुछ कहानी वाराणसी नगरी के निजी अस्पतालों का है जो रोज आए दिन मीडिया के माध्यम से अखबार वालों को मिलता है फिर भी कोई कारवाई नहीं की जाती है देखना यह होगा कि पूर्वांचल का हब वाराणसी जहां हजारों की संख्या में मरीज आते हैं जिनकी देखरेख और संरक्षण की जिम्मेदारी सरकार जिला प्रशासन की होती है की आंख खुलती है या शर्म हया छोड़कर वसूली का ठेकेदारी में शामिल होकर सूबे के मुख्यमंत्री के आंख में धूल झोंकते है!!

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