अपार श्रद्धा के साथ भक्तो ने डोली पर सवार भंडारी मां को पहुंचाया ससुराल

इंडिया लाइव न्यूज़ 24 वरिष्ठ रिपोर्टर मिर्ज़ापुर आत्मा प्रसाद त्रिपाठी

डोली पर सवार हो भंडारी मां पहुंची ससुराल

हजारों भक्तों भंडारी मां को उनके मायके राजा कर्ण पाल सिंह के पहाड़ से विदा करवा कर ले आए भंडारी देवी पहाड़ पर

अहरौरा हिंदुस्तान संवाद।
यह बहुत कम सुनने में आता है कि देवी देवता भी अपने ससुराल या मायके आते जाते हैं लेकिन यह अहरौरा में देखने को मिलता है जहां मां भंडारी देवी को दर्शानिया मनावन करके डोला में बैठाते हैं और मां मायके राजा कर्ण पाल सिंह के पहाड़ से अपने मंदिर अहरौरा खास डीह स्थित भंडारी देवी पर्वत पर आती है ।


यह वर्षों पुरानी परंपरा है।
इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए मंगलवार को हजारों की संख्या में भक्त,पूजारी, दर्शनीया एवं कहार मां भंडारी देवी मंदिर से चलकर शीउर गए जहां हनुमान जी का दर्शन करते हुए सभी लोग राजा कर्ण पाल सिंह के ऊंचे पर्वत पर गए वहां से दर्शनिया ने मां का मनौना एवं अर्चना कर के डोली में बिठाया और वहां से कहार डोली लेकर मां का जयकारा लगाते हुए मंदिर के लिए निकल पड़े ।


प्रत्येक तीसरे वर्ष सावन मास के दूसरे मंगलवार को मां भंडारी देवी का मनावन डोला गाजेबाजे के साथ परंपरागत ढंग से शिउर स्थित मायके राजा कर्णपाल के किले से विदा होता है।

मान्यता

इस मनावन डोला यात्रा की विशेष मान्यता यह है कि रास्ते भर महिलाएं अक्षत और पुष्प की वर्षा कर सोहर और भक्तिमय गीतों संग मां को विदा करती रहती हैं।
कोरोना संक्रमण के चलते पिछली बार इस परंपरागत मनावन यात्रा को प्रशासन द्वारा रोक दिया गया था।
इस वर्ष हर्ष और उत्साह के साथ शृंगारिया तथा मां भंडारी शक्तिपीठ के पुजारी मां को विदा करा कर ले आएं।
मां भंडारी को शक्तिपीठ स्थित मंदिर में विराजमान कराया जाएगा।
मंगलवार को कहारों संग डोली में बैठकर मां के पर्वत शिखर पर पहुंचने की कहानी अत्यंत ही रोचक है।
कहार चंदन, राजेश कुमार ,बबलू, के अनुसार मां की सवारी डोली में आने से डोली का वजन भारी हो जाता है।
विदाई गीतों तथा पारंपरिक पूजा के बाद रास्ते भर मां भंडारी का दर्शन पूजन करने के लिए भारी भीड़ उमड़ी ।

फसलों को रौंदते हुए जाता है देवी का डोला

किसानों की खड़ी फसल चाहे वह सब्जी की हो या कोई और उसको रौंदते हुए भक्त मां का डोला लेकर दौड़ते हुए जाते हैं और पीछे पीछे हजारों की संख्या में श्रद्धालु भी दौड़ते हैं ।
लेकिन जिन की फसल होती है उन किसानों को कोई परवाह नहीं होता
किसानों की मान्यता है कि जिस वर्ष मां की विदाई उनके खेतों से की जाती है उस वर्ष खेती और फसलों की पैदावार आश्चर्यजनक रूप से अधिक होती है।

शक्तिपीठ मां भंडारी के पुजारी भी रहे साथ साथ

मां भंडारी देवी का डोला राजा कर्ण पाल सिंह के पर्वत से लाने के लिए मां भंडारी देवी के पुजारी जय प्रकाश पांडेय, दुर्जय पांडेय, अरुण पांडेय अजय पांडेय रमापति मिश्रा, नागेश कुमार, संदीप, विष्णु पति चौबे ,शिशिर पांडेय, भी साथ साथ थे ।
सुरक्षा व्यवस्था का भी किया गया था कड़ा प्रबंध

भक्तों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था के भी कड़े प्रबंध किए गए थे थानाध्यक्ष संजय कुमार सिंह नायब तहसीलदार अरुण कुमार चौकी प्रभारी अहरौरा नगर सदानंद सिंह सहित पीएसी के जवान मोर्चा संभाले हुए थे ।
और भक्तों के साथ साथ चल रहे थे ।

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